Khamosh Alfaaz
for the deafening silence within you and me
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Friday, 25 March 2016
Eid Mubarak
~बच्चों की ख़ुशी देख कर अफसरदा है ग़रीब माँ
अब फ़ाक़े का क्या जवाज़ हो, कल दिन है ईद का~
Random #3
~एक तेरी आदत छोड़ने की ख़ातिर
जाने कितनी आदतें बिगाड़ ली मैंने~
Random #2
~ये मत समझना कि पलट आया हूँ मैं
बारिशों में ज़ख्म कुरेदने की रवायत पुरानी है~
Random #1
~कभी हक़ीक़त की नज़र से देखना
मुहब्बत पर पैबंद लगे नज़र आएंगे~
Valentine's Day
~मुहब्बतों के दिन मुक़र्रर हैं यहाँ
ये फ़ैसले अब दिलों पर छोड़े नहीं जाते~
December
~सर्द से जज़्बात, मुख़्तसर मुलाक़ात, बेवजह बढ़ती धुंध
दिसंबर की शामों की फितरत कुछ तुम जैसी है~
November
~आख़िरी बारिश और पहली बर्फ़ के दरमियां का बेमज़ा मौसम
तुम्हारी ज़िन्दगी में मेरा किरदार 'नवंबर' की तरह था~
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